सीतापुर (निशान न्यूज) किसान मजदूर मेले का दूसरा दिन उत्साह और रौनक से भरा रहा। सीतापुर सहित आसपास के क्षेत्रों से भारी संख्या में दर्शकों का जमावड़ा देखने को मिला। मेले में ग्रामीण संस्कृति और देशी व्यंजनों का लुत्फ उठाया।
मेले में आने वाले लोगों ने देशी अनाज सावा की खीर और देसी अनाज के लड्डू का स्वाद लेकर पारंपरिक भोजन की महक को महसूस किया। वहीं, सीतापुर जिला अस्पताल टीम द्वारा लगभग 150 लोगों का स्वास्थ्य व बीपी जांच किया गया।
मेले में लगे स्टालों के बीच कई अनोखे दृश्य भी देखने को मिले। विशेष रूप से पिसावा से आए एक आशाराम जी जो दृष्टिबाधित (आंखों से देख नहीं सकते ) अपनी अद्भुत कला से सभी का दिल जीत लिया — वे आंखों से न देख पाने के बावजूद बारीक डिजाइन वाली चारपाई बुनते हुए नज़र आए, जो सबके लिए प्रेरणास्रोत है।
खेती, खाना और पोषण पर आयोजित चर्चा में बेहटा ब्लॉक के स्वेतांक जी ने बताया कि किस तरह से किसान रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग कम करके जैविक खाद और वर्मी कंपोस्ट अपने घर या सामूहिक रूप से तैयार कर सकते हैं। उन्होंने यह भी समझाया कि बिना किसी रासायनिक प्रक्रिया के शुद्ध देशी बीजों को तैयार करना संभव है, जिससे खेती न केवल उपयोगी बल्कि टिकाऊ बन सकती है।
वहीं, विज्ञान फाउंडेशन लखनऊ के संदीप खरे जी ने शहरी मजदूरों की स्थिति और उनके दैनिक जीवन में आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।
हमसफर टीम लखनऊ द्वारा महिला मुद्दों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ, जिसने श्रोताओं को सोचने पर मजबूर किया।
इसके अलावा स्वतंत्र तालीम टीम द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर एक मनोरंजक कठपुतली नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसने बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को बेहद आनंदित किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में बहुजन आल्हा गायक रघुनाथ टेलर और उनकी टीम ने शानदार आल्हा गायन से माहौल को जीवंत किया।
कुल मिलाकर, किसान मजदूर मेले का दूसरा दिन ज्ञान, कला, संवाद और संस्कृति का सुंदर संगम रहा। इस मेले ने न केवल ग्रामीण जीवन की झलक दिखाई बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय चेतना को भी बल दिया।