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नए रोजगार कानून के विरोध में मजदूरों का प्रदर्शन, मनरेगा बचाने की उठी मांग

-काली पट्टी बांधकर निकले मज़दूर, गांधी और आंबेडकर पार्क पहुंचकर जताया विरोध

सीतापुर (निशान न्यूज) महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जिले में बड़ी संख्या में मजदूरों ने प्रस्तावित “विकसित ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (ग्रामीण)” के विरोध में प्रदर्शन किया। संगतिन किसान मजदूर संगठन (एसकेएमएस) के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में ग्रामीण क्षेत्रों से आए मजदूरों ने रैली निकालकर इस कानून पर विरोध दर्ज कराया।

सोमवार को मजदूर कांशीराम कॉलोनी के पास एकत्र हुए, जहां जनसभा आयोजित की गई। सभा के बाद प्रदर्शनकारी मज़दूरों ने रैली निकालते हुए लालबाग चौराहा से आंख अस्पताल स्थित गांधी पार्क पहुंचे, जहां महात्मा गांधी को नमन किया गया। इसके बाद रैली म्युनिसिपल मार्केट स्थित आंबेडकर पार्क पहुंची, जहां बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद मजदूर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।

प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने माथे पर काली पट्टी बांधकर और सिर पर मिट्टी ढोने वाला तसला रखकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारी मज़दूरों का कहना था कि प्रस्तावित नया कानून मनरेगा की मूल भावना को कमजोर करने वाला है। मजदूरों का आरोप है कि मनरेगा के तहत काम मांगने पर रोजगार मिलना उनका अधिकार था, जबकि नए प्रावधानों में रोजगार उपलब्धता को बजट आधारित करने से मजदूरों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

प्रदर्शनकारी मज़दूरों ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में मनरेगा के तहत केंद्र और राज्य सरकार के बीच खर्च का अनुपात लगभग 90:10 है, जबकि नए कानून में इसे 60:40 करने का प्रस्ताव है। मजदूरों का कहना है कि इससे राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ेगा और रोजगार उपलब्ध कराने में कमी आने की आशंका है। 
सभा में वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा ने पिछले दो दशकों में ग्रामीण मजदूरों, महिलाओं और भूमिहीन परिवारों के जीवन स्तर में सुधार किया है।

योजना के तहत 100 दिन रोजगार की गारंटी, बेरोजगारी भत्ता और न्यूनतम मजदूरी जैसी व्यवस्थाओं ने मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। मजदूरों ने कहा कि मनरेगा लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन में कमी आई है और मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने लगा है।
मजदूरों ने कोरोना काल का जिक्र करते हुए कहा कि लॉकडाउन के दौरान जब रोजगार के अन्य साधन बंद हो गए थे, तब मनरेगा ने लाखों परिवारों को आर्थिक सहारा दिया। प्रदर्शनकारियों ने हाल ही में पेश केंद्रीय बजट में प्रस्तावित योजना के लिए निर्धारित धनराशि को भी अपर्याप्त बताते हुए 125 दिन रोजगार देने के दावे पर सवाल उठाए।

प्रदर्शन के अंत में मजदूरों ने सरकार से मनरेगा के मूल स्वरूप, नाम और उद्देश्य को सुरक्षित रखने तथा प्रस्तावित नए कानून को वापस लेने की मांग की।
ज्ञापन देने वालों में ऋचा सिंह, रामबेटी, कौसर जहां, बिटोली, जमुना, जगन्नाथ, रामकिशोर, प्रकाश, पिंटू, साकरून, जसना, सुदामा, केश्काली, सुरेश, रामदेवी, राजराम, पप्पू, विद्यासागर, कुंती, रेशमा, दुर्गेश, रामसरन, सीता, रोशन, मंगूलाल, शांति, रामसेवक, उत्तम और राजेश शामिल रहे।

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