- किसान मजदूर मेले में ग्रामीण जीवन के विभिन्न आयामों से रूबरू हुए लोग
सीतापुर (निशान न्यूज)- संगतिन द्वारा मोटे अनाज पर जागरूकता और उनकी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए आयोजित किये गए दो दिवसीय किसान मजदूर मेले का उद्घाटन शनिवार को हुआ।
अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के मौके पर आयोजित इस मेले का उद्घाटन अलग-अलग मिट्टी के बर्तन में रखे सात प्रकार के अनाज को एक बड़े मिट्टी के मटके में डालकर किया गया और 'मिली-जुली खेती जगत हितैषी' के नारे के साथ मिश्रित खेती को अपनाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता सुधा नागवरपु ने लोगों को संबोधित करते हुए मेले के आयोजन के उद्देश्य पर अपनी बात रखी। मिश्रिख ब्लाक के कार्यकर्ता कमल किशोर ने विस्तार से बताया कि संगठन के लोगों ने 2015 में मोटे अनाज की शुरुआत की थी और वर्तमान में कुतुबनगर में इसका प्रोसेसिंग यूनिट लगा हुआ है। भोजन के अधिकार अभियान से जुड़े कार्यकर्ता राजशेखर ने देश में कुपोषण के आंकड़ों को सबके सामने रखते हुए पोषण को बढ़ाने के लिए देशी अनाज के प्रयोग पर जोर दिया। इस अवसर पर डीडी एग्री, जिले में मोटे अनाज के काम को देख रहे अनुभव और किसान नीरज मिश्रा ने भी अपनी बात रखी।
किसानों और मजदूरों द्वारा आयोजित इस मेले में अलग-अलग स्टाल लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।
लखनऊ की संस्था हमसफ़र के स्टाल में जेंडर और युवा विकास को केंद्रित करते हुए खेल और चर्चा चलायी।
इसी तरह एक अन्य 'स्टाल हमारी विरासत हमारा इतिहास' में पुराने सामान की प्रदर्शनी से अपने स्वायत्त समाज को याद किया और लोगों को अहसास दिलाया गया कि आज हम कैसे कंपनी के सामान पर निर्भर हो गए हैं। इसी प्रकार दूसरे स्टाल मनरेगा-हमारी संजीवनी बूटी और हेल्प डेस्क के माध्यम से राशन, पेंशन, मनरेगा, आयुष्मान कार्ड की वर्तमान स्थिति को मेले में आये लोगों ने जाना। इसी तरह सेहत का बारदाना और देशी अनाज के डेमो से देशी अनाज के उत्पादन और खानपान में शामिल करने के संदेश को जाना। आंख अस्पताल सीतापुर की ओर से कार्यक्रम में स्वास्थ्य कैंप भी लगाया गया जहां सैकड़ों लोगों को सेहत से संबंधित परामर्श दिया गया। समता युवा मंच के स्टॉल पर युवाओं ने तरह तरह के खेलों का आनंद लिया।
इस अनूठे मेला में गांव और शहर से सैकड़ों युवा, महिलाएं, किसान, और जागरूक नागरिक शामिल हुए और मेले की गतिविधियों को सराहा।
मेले के पहले दिन का अंत बनारस के प्रेरणा कला मंच के कलाकारों द्वारा प्रेमचंद की कहानी सद्गति पर आधारित सामाजिक असमानता पर चोट करने वाले नाटक 'साइत सगुन' का सजीव मंचन कर किया गया। जाति व्यवस्था पर चोट करते इस नाटक ने जागरूक करने के साथ ही लोगों में संदेश भी दिया। नाटक को देखकर उपस्थित दर्शक भाव विभोर हो गए और तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का अभिनंदन किया।
संगतिन किसान मजदूर संगठन की ओर से ऋचा सिंह ने शहर के नागरिकों से अपील की कि रविवार को मेले के अंतिम दिन शहर के सभी नागरिकों से शामिल होने का आह्वान किया।